शोध, संरक्षण और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का राष्ट्रीय अभियान

5+ वर्ष शोध, दस्तावेजीकरण एवं सांस्कृतिक प्रयास

हमारी शोध परियोजनाएँ

शोध, संरक्षण और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की हमारी पहल

रामायण रिसर्च काउंसिल भारतीय संस्कृति, मां जानकी के जीवन-दर्शन, रामायण परंपरा और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण हेतु विभिन्न शोध परियोजनाओं पर कार्य कर रही है। हमारा उद्देश्य ऐतिहासिक तथ्यों, आध्यात्मिक मूल्यों और भारतीय ज्ञान परंपरा का दस्तावेजीकरण कर उन्हें भावी पीढ़ियों तक पहुँचाना है।

हमारे प्रमुख संकल्प

हमारा दृष्टिकोण

शोध, संरक्षण और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का राष्ट्रीय अभियान

रामायण रिसर्च काउंसिल भारतीय संस्कृति, रामायण परंपरा, सनातन जीवन-दर्शन और नारी-आदर्श के विभिन्न आयामों पर गंभीर एवं तथ्याधारित अध्ययन के लिए निरंतर प्रयासरत है। काउंसिल की शोध परियोजनाओं का उद्देश्य केवल ऐतिहासिक तथ्यों का संकलन करना नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक धरोहरों और जीवन-मूल्यों को वर्तमान और भावी पीढ़ियों तक प्रभावी रूप से पहुँचाना भी है।

काउंसिल विशेष रूप से मां जानकी के प्राकट्य-क्षेत्र सीतामढ़ी को सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और शोध केंद्र के रूप में विकसित करने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। इसी उद्देश्य से विभिन्न शोध, दस्तावेजीकरण, प्रकाशन, सांस्कृतिक अध्ययन और धरोहर संरक्षण परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है।

श्रीराम-जानकी स्थान पुनरोद्धार एवं सांस्कृतिक धरोहर परियोजना

सीतामढ़ी के 833 वर्ष प्राचीन राघोपुर बखरी स्थित श्रीराम-जानकी स्थान के ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और स्थापत्य महत्व के अध्ययन, दस्तावेजीकरण तथा पुनरोद्धार की दिशा में काउंसिल कार्यरत है। इस परियोजना का उद्देश्य इस प्राचीन मठ को पुनः सांस्कृतिक और धार्मिक चेतना के केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

मां जानकी शक्ति-धाम विकास परियोजना

काउंसिल ने सीतामढ़ी में 12 एकड़ भूमि परिसर में 51 शक्तिपीठों की मिट्टी और ज्योत लाकर एक दिव्य शक्ति-स्थल विकसित करने का संकल्प लिया है। इस परियोजना में भव्य मंदिर, सांस्कृतिक परिसर और नारी-आदर्श पर आधारित केंद्रों की स्थापना प्रस्तावित है।

जानकी शोध केंद्र स्थापना परियोजना

विश्व में नारी-शक्ति और ‘सीता-तत्त्व’ पर व्यवस्थित शोध के अभाव को देखते हुए काउंसिल ‘जानकी शोध केंद्र’ की स्थापना का संकल्प लेकर कार्य कर रही है। इस केंद्र में अध्ययन, शोध, प्रकाशन, पुस्तकालय और डिजिटल संग्रहालय की स्थापना प्रस्तावित है।

श्रीभगवती सीता – महाशक्ति साधना शोध परियोजना

काउंसिल ने मां सीताजी के शक्ति-स्वरूप, नारी-आदर्श और आध्यात्मिक स्वरूप पर आधारित पुस्तक ‘श्रीभगवती सीता – महाशक्ति साधना’ का प्रकाशन किया है। इस शोध परियोजना का उद्देश्य मां जानकी के जीवन-दर्शन और नारी-शक्ति के आध्यात्मिक आयामों को प्रमाणिक रूप से समाज के समक्ष प्रस्तुत करना है।

सीतामढ़ी तीर्थ-क्षेत्र विकास अध्ययन परियोजना

काउंसिल पूरे सीतामढ़ी क्षेत्र को एक वैश्विक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए अध्ययन और जन-जागरण अभियान चला रही है। इस परियोजना के अंतर्गत सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक स्थलों और तीर्थ पर्यटन की संभावनाओं पर भी कार्य किया जा रहा है।

बहुभाषी शोध एवं प्रकाशन परियोजना

काउंसिल द्वारा प्रकाशित शोध साहित्य को विभिन्न भारतीय एवं अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में अनुवादित कर विश्वभर तक पहुँचाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है, ताकि मां जानकी के जीवन-आदर्श और भारतीय संस्कृति का संदेश वैश्विक स्तर पर प्रसारित हो सके।

आइए, रामायण के ज्ञान और सांस्कृतिक चेतना के इस अभियान में सहभागी बनें। हमसे जुड़ें