रामायण रिसर्च काउंसिल, अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि और श्रीराम मंदिर आंदोलन के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, सामाजिक तथा आध्यात्मिक आयामों पर निरंतर अध्ययन एवं शोध कर रही है। श्रीराम मंदिर केवल एक धार्मिक संरचना नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक अस्मिता, राष्ट्रीय स्वाभिमान और करोड़ों सनातनियों की आस्था का जीवंत प्रतीक है।
काउंसिल का मानना है कि श्रीराम मंदिर का निर्माण पाँच शताब्दियों के संघर्ष, त्याग, बलिदान और अटूट श्रद्धा का परिणाम है। इस ऐतिहासिक यात्रा को तथ्याधारित रूप में संरक्षित करना और भावी पीढ़ियों तक पहुँचाना समय की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से काउंसिल ने श्रीराम मंदिर आंदोलन से संबंधित ऐतिहासिक घटनाओं, जन-स्मृतियों, दस्तावेजों, न्यायिक प्रक्रियाओं, सामाजिक आंदोलनों और सांस्कृतिक प्रभावों का व्यापक अध्ययन एवं दस्तावेजीकरण किया है।
इसी शोध-यात्रा के अंतर्गत काउंसिल ने ‘श्रीरामलला – मन से मंदिर तक’ नामक 1,200 से अधिक पृष्ठों का एक वृहद शोध-ग्रंथ तैयार किया है। यह ग्रंथ श्रीराम मंदिर संघर्ष की ऐतिहासिक यात्रा, उससे जुड़े प्रसंगों और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की विस्तृत गाथा प्रस्तुत करता है।
श्रीराम जन्मभूमि से जुड़े ऐतिहासिक साक्ष्यों, आंदोलन की प्रमुख घटनाओं, जन-आंदोलनों और सांस्कृतिक प्रसंगों का तथ्याधारित अध्ययन एवं व्यवस्थित दस्तावेजीकरण।
श्रीराम मंदिर निर्माण को भारत की सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय स्वाभिमान और सनातन पुनर्जागरण के प्रतीक के रूप में समझने तथा उसकी प्रेरणा को जन-जन तक पहुँचाने की सतत पहल।
श्रीराम मंदिर आंदोलन की गाथा को केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित न रखकर उसे एक जीवंत सांस्कृतिक धरोहर के रूप में संरक्षित करना, नई पीढ़ी को इस संघर्ष के मूल्यों से परिचित कराना तथा भारत की सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय स्वाभिमान की इस अद्वितीय यात्रा को विश्व के समक्ष तथ्यपूर्ण रूप में प्रस्तुत करना हमारा ध्येय है।
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