रामायण रिसर्च काउंसिल के विषय में सारांश में जानिए
‘रामायण रिसर्च काउंसिल’ ट्रस्ट के रूप में पंजीकृत संस्था है तथा समाज एवं राष्ट्रहति में कई प्रकल्पों पर कार्य कर रही है। काउंसिल आयकर विभाग अंतर्गत 12A और 80G अप्रूव्ड है। CSR लेने हेतु पंजीकृत है। निति आयोग में पंजीकृत है। काउंसिल शायद देश की एकमात्र ऐसी संस्था है जो हमारे जीवन की आधार जगतजननी मां सीताजी की प्राकट्य स्थली सीतामढ़ी (बिहार) को शक्ति क्षेत्र के रूप में विकसित करने के लिए भी कार्य करती है और हमारे आराध्य प्रभु श्रीरामलला के जन्म-स्थान अयोध्या में 492 वर्षों के मंदिर संघर्ष पर अब तक का सबसे बड़ा साहित्य-ग्रंथ भी तैयार करती है। काउंसिल के परमाध्यक्ष पवनसुत श्री हनुमान जी महाराज हैं।
काउंसिल संस्कृति एवं संस्कार को जीवंत रखने में साहित्य को बड़ा माध्यम मानती है, यही कारण है कि काउंसिल साहित्य- सृजन हेतु शोध कार्यों पर विशेष ध्यान देती रही है ।
- अयोध्या में श्रीराम मंदिर संघर्ष पर आधारित 1250 पृष्ठों का एक ग्रंथ ‘श्रीरामलला – मन से मंदिर तक ‘ हिन्दी भाषा में पूर्ण हो चुका है। अंग्रेजी भाषा में अनुवाद जारी है।
- माता सीताजी की आराधना एवं भक्ति पर आधारित पुस्तक ‘श्रीभगवती सीता – महाशक्ति साधना’ वर्ष 2023 में जानकी नवमी के पवित्र अवसर पर नई दिल्ली से प्रकाशित हो चुकी है।
- काउंसिल पिछले तीन वर्षों से अधिक समय से संस्कृत भाषा में पाक्षिक पत्रिका ‘रामायण वार्ता’ का प्रकाशन का कार्य भी करती रही है। वहीं, संस्कृत भाषा के प्रसार के लिए शिक्षण-प्रशिक्षण हेतु 60 दिनों के कोर्स पर आधारित एक पुस्तिका ‘देवभाषा संस्कृत सीखें’ को भी तैयार किया गया है तथा जगह-जगह ‘देवभाषा संस्कृत-कार्यशाला’ का भी आयोजन किया जाता रहा है। इस निमित्त देवभाषा संस्कृत पर कार्य करने वालों को हर वर्ष हम ‘संस्कृत भूषण सम्मान’ भी प्रदान करते हैं। गत ‘संस्कृत- भूषण सम्मान’ वर्ष 2025 में 06 अगस्त को आयोजित हुआ था।
- सनातन विचार को प्रसार करने वाली पुस्तक ‘सनातन संग भारत’, जिसका विमोचन बागेश्वर सरकार आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी की उपस्थिति में पद्मविभूषण जगदगुरु पूज्य स्वामी श्रीरामभद्राचार्य महाराज, पटना (बिहार) के गांधी मैदान में 06 जुलाई 2025 को ‘सनातन महाकुंभ’ आयोजन में कर चुके हैं।
- वर्ष 2025 में आयोजित महाकुंभ में अधिकांश प्रमुख गतिविधियों को चित्र सहित सम्मिलित कर इस विषय पर अब तक के सबसे वृहद साहित्य ‘महाकुंभ का महामंथन’ को हिन्दी तथा अंग्रेजी भाषा में कॉफीटेबल बुक के रूप में तैयार किया गया है ।
- वैदेहीनंदन पंडित वेदांत जी महाराज ( 12 वर्षीय) द्वारा बालमन को सांस्कृतिक विचारों से जोड़ने वाले पद्य ‘वेदांत पुष्प’ को तैयार किया गया है। बच्चों में संस्कृति, संस्कार, अनुशासन व नैतिक संवर्धन हेतु काउंसिल ने पुस्तक ‘मानस में बाल-संस्कार’ को तैयार किया है। इस पुस्तक के ही आधार पर काउंसिल की एक टीम ‘रामायण मंच’ प्रकल्प के माध्यम से बच्चों को संस्कारित करती रही है। इस पुस्तक के लेखक भी वैदेहीनंदन वेदांत जी ही हैं ।
- वहीं, वैदेहीनंदन जी ने कही माँ जानकीजी को समर्पित पांच प्रमुख पुस्तकें पूर्ण की हैं— 1. ‘श्रीभगवती सीताजी- प्राकट्य-रहस्यम’, 2. अवतार रहस्यः कमला से किशोरी तक 3. ‘श्रीसीतारामः विवाह-उत्सव’, 4. ‘महाशक्ति सीताजी’, 5. मैथिली और मिथिला।
- लोकपरंपराओं को दर्शाता पद्य ‘ अवधि लोकगीतों में सीता-राम’ को जनमानस हेतु तैयार किया है।
- ‘अमृतकाल की सांस्कृतिक यात्रा’ को भी काउंसिल ने तैयार किया है जिसमें विगत कई वर्षों में कई मठ-मंदिरों के नवोत्थान ‘हेतु ‘सांस्कृतिक नवचेतना’ का सचित्र उल्लेख है।