रामायण रिसर्च काउंसिल, रामायण को केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि भारतीय जीवन-दर्शन, संस्कृति, नीति, आदर्श शासन, पारिवारिक मूल्यों और मानवता के शाश्वत मार्गदर्शक ग्रंथ के रूप में देखती है। काउंसिल का उद्देश्य रामायण के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, दार्शनिक, सामाजिक और आध्यात्मिक आयामों पर गहन एवं तथ्याधारित शोध को प्रोत्साहित करना है।
रामायण भारतीय सभ्यता की आत्मा है। इसमें वर्णित मर्यादा, कर्तव्य, करुणा, त्याग, सेवा, नारी-सम्मान, राष्ट्रधर्म और लोककल्याण के सिद्धांत आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने हजारों वर्ष पूर्व थे। काउंसिल इन मूल्यों को शोध, अध्ययन, प्रकाशन और जन-जागरण के माध्यम से वर्तमान और भावी पीढ़ियों तक पहुँचाने के लिए निरंतर कार्यरत है।
वाल्मीकि रामायण, रामचरितमानस तथा अन्य रामायण परंपराओं में निहित ज्ञान, दर्शन और जीवन-मूल्यों का समकालीन संदर्भों में अध्ययन एवं विश्लेषण।
रामायण की शिक्षाओं को शोध, प्रकाशन, व्याख्यान और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से युवाओं एवं समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुँचाने की सतत पहल।
रामायण को केवल अध्ययन का विषय बनाना ही हमारा ध्येय नहीं है, बल्कि उसके जीवन-मूल्यों, सांस्कृतिक चेतना और मानव कल्याण के संदेश को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाना भी हमारा संकल्प है। काउंसिल का प्रयास है कि शोध, संवाद और साहित्य-सृजन के माध्यम से रामायण की शिक्षाओं को आधुनिक संदर्भों में पुनः स्थापित किया जाए तथा भारत की सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जाए।
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