रामायणवार्ता – संस्कृतवार्ताः

रामायणीसम्मानः २०२६

अस्य पृष्ठस्य संस्कृतानुवादः शीघ्रम् उपलप्स्यते। तावत् मूलहिन्दीपाठः प्रदर्श्यते।

रामायणी सम्मान आयोजन का उद्देश्य

  • रामायण क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों का राष्ट्रीय सम्मान।
  • विलुप्त होती रामायण परंपराओं और लोक कलाओं का दस्तावेज़ीकरण।
  • नई पीढ़ी को रामायण साहित्य और संस्कृत से जोड़ना।
  • भारतीय ज्ञान परंपरा के संवाहकों का सम्मान एवं प्रोत्साहन।
  • रामायण वांगमय के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा के पुण्य-प्रवाह को निरंतरता प्रदान करना।

19 अगस्त 2026 को बीएचयू में 28 विभूतियों को मिला रामायणी सम्मान

  • काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के भारत अध्ययन केंद्र में संपन्न हुआ सम्मान समारोह।
  • देश के कई शिक्षाविद, संत एवं सांसद-सदस्यगण हुए शामिल।
  • ‘रामायणी सम्मान’ को एक अभियान की तरह देशभर में हर ज़िले में आयोजित करने का संकल्प।
  • नई पीढ़ी को रामायण साहित्य व भारतीय संस्कृति से जोड़ना और प्रोत्साहन प्रदान करना है इसका उद्देश्य।

रामायण रिसर्च काउंसिल के तत्वावधान में गोस्वामी तुलसीदासजी की जयंती पर चयनित 28 विभूतियों को ‘रामायणी सम्मान’ प्रदान किया गया। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के अंतर्गत भारत अध्ययन केंद्र के सहयोग से मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र में आयोजित इस सम्मान समारोह में कई शिक्षाविद, संत एवं सांसद सदस्यगण सम्मिलित हुए। इस दौरान काउंसिल के महासचिव श्री कुमार सुशांत जी ने इस ‘रामायणी सम्मान’ को देशभर में हर ज़िले तक पहुंचाने का संकल्प लिया। समारोह में श्री अजय भट्ट जी (नैनीताल-उधमसिंहनगर, उत्तराखण्ड से सांसद एवं काउंसिल के बोर्ड ऑफ ट्रस्टी के अध्यक्ष), छत्तीसगढ़ में सरगुजा से सांसद श्री चिंतामणि महाराज जी, पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित चतुर्वेदी जी रहे। वहीं ‘रामायणी सम्मान’ पा रहे लोकप्रिय भजन सम्राट पद्मश्री अनूप जलोटा ने ऐसी लागी लगन... भजन गाकर सबका दिल जीत लिया। रामायण रिसर्च काउंसिल के ट्रस्टी एवं रामायणी सम्मान के संयोजक देवदत्त शर्मा जी (सेवानिवृत्त IAS), काशी हिन्दू विश्वविद्यालय अंतर्गत भारत अध्ययन केंद्र के समन्वयक प्रो. शरदिन्दु कुमार तिवारी जी, बीएचयू में कला संकाय की डीन प्रो. सुषमा घिल्ढियाल जी, श्री पिताम्बर मिश्र जी आदि की प्रमुख भूमिका रही। वहीं, ‘रामायणी सम्मान’ में श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष पद्मश्री पूज्य आचार्य डॉ. हरिहर कृपालु त्रिपाठी जी महाराज, प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पूज्य प्रो. चंद्रमौली उपाध्याय जी, श्रीजानकी-कथा-मर्मज्ञ बाल-व्यास वैदेहीनंदन पंडित वेदांतजी, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता भरत नागर, वाराणसी जोन के एडीजी पुलिस नवीन अरोड़ा, सीतामढ़ी के जिला संगठन प्रभारी नीरज गोयनका, श्रीरामजानकी मठ जीर्णोद्धार समिति के प्रभारी विजय कुमार, सीता सखी समिति की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. अंजना प्रकाश, सीए राकेश सिंह, विनोद शर्मा समेत काशी हिन्दू विश्वविद्यालय रामायण रिसर्च काउंसिल एवं ‘रामायणी सम्मान’ चयन समिति के कई सदस्यगण उपस्थित रहे।

इन विशिष्ट जनों को मिला रामायणी-सम्मान :

अनूप जलोटा (भजन-सम्राट), अनुराधा पौडवाल (मुंबई), आर.के. सिन्हा (बिहार), किशोर कुणाल, पटना (मरणोपरांत), डॉ. अर्चना प्रकाश (लखनऊ), भगवान दास (नई दिल्ली), डॉ. उदय प्रताप सिंह (वाराणसी), डॉ. अवधी हरि (लखनऊ), योगेश्वर प्रसाद देवरानी (नैनीताल), आदित्य जैन नीमच (मध्य प्रदेश), अभय माणके (इंदौर), संत हरिओम (हाथरस), नरेंद्रनाथ गगन (बिहार), योगेश चंद्र शर्मा- योगी, (आगरा), संजीव कुमार (बिहार), डॉ. आशा ओझा (बिहार), मदुगुल्ला प्रफुल्ला (आंध्र प्रदेश), विनोद कुमार तिवारी (झारखंड), डॉ. चंद्र प्रभा मदान (हरियाणा), आचार्य संतोष पांडेय (राजस्थान), अजय याग्निक (दिल्ली), विंध्याचल मणि त्रिपाठी (यूपी), राजराधे कृष्ण शर्मा (महाराष्ट्र), प्रेम प्रकाश दुबे (महाराष्ट्र), त्रिलोकी नाथ पांडेय (यूपी), रामभनी द्विवेदी (यूपी), डॉ. रविशंकर पांडेय (यूपी) एवं रेखा मेहरा (नई दिल्ली)।

Tooltip Content.

इस प्रक्रिया के अधीन हुआ प्रथम सम्मान समारोह

श्रीजानकीकथायोजनाय सदस्यतायै सहयोगाय वा युज्यताम्

काउंसिल के प्रकल्पों से जुड़कर माँ जानकी और प्रभु श्रीराम के आदर्शों के प्रसार में सहभागी बनें।