Ramayan Varta – Sanskrit news

Shri Janaki Katha

नारी-संस्कार, धैर्य और साहस की प्रेरणादायी आदर्श-कथाः

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जानिए, श्रीजानकी-कथा क्यों है आवश्यक ?

रामायण रिसर्च काउंसिल एक ऐसी संस्था है जो प्रारंभ से ही राष्ट्रहित में साहित्य-सृजन का कार्य करती रही है। काउंसिल का उद्देश्य सीतामढ़ी में केवल एक मंदिर का निर्माण का नहीं रहा, बल्कि मां सीताजी पर एक शोधपरक साहित्य का सृजन करना रहा, उन साहित्य का प्रसार करना रहा, मां सीताजी के प्रेरणादायी जीवन आदर्शों को श्रीजानकी कथा के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाना रहा। इसके कई कारण हैं और केवल एक आलेख में ये व्यक्त कर पाना असंभव है, परंतु काउंसिल के मूल भाव को व्यक्त करने का प्रयत्न कर रहे हैं।
मां सीताजी, त्याग, धैर्य, निष्ठा और मर्यादा की प्रतीक मानी जाती हैं। उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा, लेकिन उन्होंने हर परिस्थिति में सत्य और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ा। आज के समय में, जब समाज तेजी से बदल रहा है और नैतिक मूल्यों में गिरावट की चर्चा होती है, ऐसे में मां सीता के आदर्शों की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है।
मंदिर निर्माण आस्था और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक होता है, लेकिन केवल भौतिक संरचना तक सीमित रह जाना पर्याप्त नहीं है। असली उद्देश्य उन मूल्यों को आत्मसात करना होना चाहिए, जिनका प्रतिनिधित्व मां सीता करती हैं। यदि उनके आदर्शों-जैसे संयम, समर्पण, सहनशीलता और पारिवारिक मूल्यों को शिक्षा, सामाजिक संवाद और अंतरराष्ट्रीय मंचों के माध्यम से फैलाया जाए, तो यह मानवता के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकता है।
वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्कृति के प्रति बढ़ती रुचि को देखते हुए, यह एक उपयुक्त समय है जब हम अपने प्राचीन आदर्शों को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत करें। योग, आयुर्वेद और ध्यान की तरह ही, यदि मां सीता के जीवन-दर्शन को भी प्रभावी ढंग से दुनिया के सामने रखा जाए, तो यह न केवल भारत की सांस्कृतिक छवि को मजबूत करेगा, बल्कि विश्व समाज को भी एक सकारात्मक दिशा प्रदान करेगा।
आज का वैश्विक समाज कई चुनौतियों से जूझ रहा है- परिवारिक विघटन, नैतिक असंतुलन, और व्यक्तिगत स्वार्थ की बढ़ती प्रवृत्ति । ऐसे समय में मां सीता के आदर्श लोगों को संतुलन, सहनशीलता और रिश्तों के प्रति जिम्मेदारी का संदेश देते हैं। उनका जीवन यह सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी अपने मूल्यों से समझौता नहीं करना चाहिए।
इसके अलावा, भारतीय सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करना भी आवश्यक है। जैसे रामायण ने विभिन्न देशों और संस्कृतियों को प्रभावित किया है, वैसे ही मां सीता के जीवन-दर्शन को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत कर विश्व में सकारात्मक संवाद को बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे भारत की सांस्कृतिक पहचान और "वसुधैव कुटुंबकम्" की भावना को भी बल मिलता है।
मां सीता के आदर्श महिलाओं के सशक्तिकरण के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण हैं। उनका व्यक्तित्व केवल त्याग तक सीमित नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, दृढ़ता और निर्णय क्षमता का भी प्रतीक है। इन पहलुओं को सामने लाकर एक संतुलित और सशक्त समाज के निर्माण की दिशा में प्रेरणा दी जा सकती है।
मां जानकी जी के जीवन आदर्शों को वैश्विक स्तर पर ले जाने संबंधी केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के विचारों से प्रेरित होकर रामायण रिसर्च काउंसिल ने पहले भारत में और फिर धीरे-धीरे वैश्विक स्तर पर जगह-जगह श्रीजानकी कथा आयोजित करवाने का निश्चय किया है। चिंतन है कि भारतीय संस्कृति में मां सीता ( माता जानकी) मात्र एक पौराणिक पात्र नहीं, बल्कि धैर्य, शक्ति और शुचिता का वह उच्चतम शिखर हैं, जिसका अनुसरण कर कोई भी समाज नैतिक पतन से बच सकता है। आज जहां महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान एक वैश्विक चुनौती बनी हुई है, वैसी स्थिति में मां जानकी जी के जीवन आदर्शों को 'श्रीजानकी कथा' के माध्यम से प्रसार करना केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक सामाजिक क्रांति का आधार बन सकता है।
जब समाज 'जानकी कथा' के माध्यम से मां सीता के त्याग और उनके स्वाभिमान को गहराई से समझेगा, तो महिलाओं के प्रति देखने के नजरिए में बुनियादी बदलाव आएगा। मां सीता 'शक्ति' का स्वरूप हैं। समाज जब उन्हें केवल एक " अबला " के रूप नहीं, बल्कि अयोनिजा' (दिव्य जन्म) और जनकनंदिनी के रूप में देखेगा, तो स्त्रियों के प्रति श्रद्धा और सम्मान का भाव स्वतः जागृत होगा। यह भाव पुरुष मानस में महिलाओं को भोग की वस्तु के बजाय आदरणीय शक्ति के रूप में स्थापित करेगा । कोई संदेह नहीं कि महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों की जड़ में चारित्रिक गिरावट और संस्कारों का अभाव होता है। 'जानकी कथा' के माध्यम से जब मर्यादा पुरुषोत्तम राम और माता सीता के पवित्र संबंधों की चर्चा होगी, तो नई पीढ़ी को रिश्तों की मर्यादा का बोध होगा। मां सीता के पातिव्रत्य और उनके आत्मबल की गाथा अनैतिक विचारों पर अंकुश लगाने का कार्य करेगी। जब समाज नारी में 'जगदंबा' का अंश देखने लगेगा, तो आपराधिक मानसिकता का क्षय होगा।
प्रायः सीताजी को केवल उनके कष्टों के लिए याद किया जाता है, किंतु उनका वास्तविक स्वरूप साहस का है। महल के ऐश्वर्य को त्यागकर दुर्गम वनों को चुनना, रावण जैसे आतातायी के सम्मुख अशोक वाटिका में निर्भीक होकर खड़े रहना और अपनी पवित्रता के लिए अग्नि परीक्षा से गुजरना - ये घटनाएं बताती हैं कि वे कितनी साहसिक थीं। आधुनिक महिलाएं जब इस पक्ष को जानेंगी, तो वे स्वयं को कमजोर समझना बंद कर देंगी। विपरीत परिस्थितियों में भी अडिग रहने की प्रेरणा उन्हें मानसिक रूप से सशक्त बनाएगी।
मां सीता साक्षात लक्ष्मीजी का स्वरूप हैं। जानकी कथा यह बोध कराती है कि प्रत्येक नारी में भगवती और ईश्वरीय तत्व विद्यमान है। जब एक महिला को अपनी इस आंतरिक शक्ति का आभास होता है, तो उसमें आत्मनिर्भरता का भाव स्वतः उत्पन्न होता है। वह केवल दूसरों पर आश्रित रहने के बजाय अपनी योग्यता और ईश्वरीय क्षमता पर विश्वास करना सीखती है। यह बोध उन्हें आर्थिक, सामाजिक और आध्यात्मिक रूप से स्वतंत्र होने की प्रेरणा देता है।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में धैर्य का अभाव है। माता सीता का जीवन धैर्य की पराकाष्ठा है। उन्होंने राजभवन से लेकर वनवास और फिर ऋषि वाल्मीकि के आश्रम में एक एकाकी जीवन तक, हर परिस्थिति को धैर्य के साथ स्वीकार किया।
वे आने वाली पीढ़ियों के लिए आदर्श माता और पत्नी के रूप में संस्कारों की जननी हैं। उनके जीवन से यह सीखने को मिलता है कि संघर्ष स्थाई नहीं होते, लेकिन आपका चरित्र स्थाई होता है ।
'जानकी कथा' का प्रारंभ समाज में एक ऐसी चेतना का संचार करेगा जहां नारी को उसकी विलुप्त हो चुकी शक्ति का पुन: स्मरण होगा। यह आलेख इस बात पर बल देता है कि मां सीता के आदर्शों को अपनाकर हम एक ऐसे श्रीरामराज्य' की कल्पना कर सकते हैं, जहां महिलाएं न केवल सुरक्षित होंगी, बल्कि वे राष्ट्र निर्माण में अपनी ईश्वरीय मेधा का पूर्ण उपयोग कर सकेंगी। माता जानकी का जीवन हमें सिखाता है कि नारी केवल सृष्टि की रचना नहीं, बल्कि सृष्टि का आधार है। उनके आदर्शों को घर-घर पहुँचाना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
रामायण रिसर्च काउंसिल जहां एक ओर सीतामढ़ी को शक्ति क्षेत्र के रूप में विकसित करने हेतु लंबे समय से कार्य करती आ रही है, वहीं काउंसिल के तत्त्वावधान में 'श्रीजानकी कथा' समाज में एक ऐसी चेतना का संचार कर रही है, जहां नारी को उसकी विलुप्त हो चुकी शक्ति का पुनः स्मरण कर रही है। मां सीता के आदर्शों को अपनाकर हम एक ऐसे 'श्रीरामराज्य' की कल्पना कर रहे हैं, जहां महिलाएं न केवल सुरक्षित, सुसंस्कृत, अनुशासित, साहसिक, धैर्यवान एवं नारीत्व - संस्कार को ग्रहण कर मां सीताजी के प्रेरित होती रहेंगी, बल्कि वे राष्ट्र निर्माण में अपनी ईश्वरीय मेघा का पूर्ण उपयोग कर सकेंगी।

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श्रीजानकी-कथा के आयोजन के लिए 11 मई 2026 को काउंसिल परिवार ने लिया संकल्प

11 मई 2026 को नई दिल्ली स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब में प्रेस वार्ता कर देशभर में श्रीजानकी कथा हेतु संकल्प | इस अवसर पर रामायण रिसर्च काउंसिल के बोर्ड ऑफ ट्रस्टी के अध्यक्ष श्री अजय भट्ट जी (माननीय सांसद), राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की अध्यक्ष पूज्य साध्वी निरंजन ज्योति जी, श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर पूज्य स्वामी चित्प्रकाशानंद गिरी जी महाराज आदि उपस्थित रहे। पूरे काउंसिल परिवार ने इस विषय पर सहमति व्यक्त की की श्री अजय भट्ट जी के नेतृत्व में पूरे देशभर में श्रीजानकीजी के प्रेरणादायी जीवन - आदर्शों का प्रसार किया जाएगा एवं इस हेतु श्रीजानकी कथा का जगह-जगह आयोजन किया जाएगा।

पहली श्रीजानकी- कथा उत्तराखंड में रामनगर स्थित सीताबनी में हुई थी

सीताबनी का ये स्थान नैनीताल जिले के रामनगर के पाटकोट रेंज में है। ये त्रेतायुगीन है और इसका संदर्भ रामायण से जुड़ा है, ऐसा बताया जाता है। यहां दिनांक 16 मई 2026 को पहली श्रीजानकी कथा आयोजित हुई ।
प्रथम श्रीजानकी कथा प्रारंभ होने से पूर्व पूरे देशभर में श्रीजानकी कथा के माध्यम से श्रीजानकी जी के प्रेरणादायी जीवन- आदर्शों के प्रसार हेतु संकल्प लेते भारत सरकार के पूर्व रक्षा एवं पर्यटन राज्य मंत्री तथा नैनीताल- उधमनगर से सांसद श्री अजय भट्ट जी (सपत्नीक) । उनके साथ पूजन पर रहे विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय सह मंत्री (सेवा विभाग ) श्रीमान आनंद प्रकाश हरबोला जी ।

'श्रीजानकी-कथा' के आयोजन हेतु संपर्क करें-

अगर आप भी अपने क्षेत्र में श्रीजानकी-कथा का आयोजन करना चाहते हैं तो हमसे संपर्क करें। काउंसिल माताओं-बहनों को समाज में संबल प्रदान करने के ही मां सीताजी पर ये अभियान संचालित कर रही है। अतः आप मां जानकीजी पर कथा करवाकर आप समाज को एक नारी वंदन, सशक्तिकरण एवं सांस्कृतिक चेतना की ओर अग्रसर करने में अपनी प्रमुख भूमिका भी निर्वहन करेंगे।

संपर्क करें- +91 8800466775

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