Ramayan Varta – Sanskrit news

Ramayan Varta

Sanskrit news portal and fortnightly e-magazine

An English version of this page is on its way. Until then, the original Hindi text is shown below.

रामायण वार्ता के विषय में

'रामायण वार्ता', 'रामायण रिसर्च काउंसिल' का एक प्रकल्प है। "रामायण वार्ता' का उद्देश्य है - देवभाषा संस्कृत का प्रसार करना। इस हेतु हम ' रामायण रिसर्च काउंसिल' के तत्त्वावधान में पंजीकृत पत्रिका 'रामायण वार्ता' का संस्कृत में प्रकाशन एवं प्रसार कर रहे हैं। इसमें साक्षात्कार, रामायण, लोक-कला-संस्कृति साहित्य, मंदिर, ऐतिहासिक धरोहर, विश्व, राष्ट्र-निर्माण, वैदिक ज्ञान से संबंधित कई रोचक विषयों को सरल शब्दों में प्रस्तुत किया जाता है । इस कार्य में पटना आईआईटी एक नोडल संस्था है जो विश्वभर के अधिकांश सनातनियों के हाथों में इसके डिजिटल प्रारूप को पहुंचाने हेतु तकनीक भी विकसित कर रही है। इस प्रकल्प के अंतर्गत निम्न और कार्य किए जाते हैं।
संस्कृत भाषा में समाचार एवं संस्कृति पर आधारित वेबसाइट www.ramayanvarta.com का संचालन एवं प्रसार।
Ramayan Varta का यू-ट्यूब चैनल भी हिन्दी-संस्कृत द्वि-भाषा में संचालन, जो साक्षात्कार, संस्कृत व संस्कृति-संबंधी सूचना, ऐतिहासिक धरोहर, लोक-संस्कृति तथा ज्ञानवर्धक विषयों की जानकारी पर
संस्कृत भाषा के प्रति आमजन में जागरूकता हेतु 60 दिनों का एक कोर्स डिवेलप किया गया है। इसे टेक्स्ट और डिजिटल दोनों प्रारूप में तैयार किया गया है जिसके माध्यम से संस्कृत के प्रसार हेतु वर्क्स-शॉप का आयोजन करना हमारे प्रमुख संकल्प में है।

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विजन

हम देवभाषा संस्कृत का जन-जन में प्रसार करना चाहते हैं। यही वो तरीका है जिससे हम सनातन के वैभव को सहस्राब्दियों तक सुरक्षित कर सकते हैं। जिस तरह हमारे समाज में अंग्रेजी का चलन बढ़ता जा रहा है, यह हमारे सामने चुनौति है कि कैसे हम संस्कृत सीखने के प्रति लोगों को जागरूक कर सकें। पूरा काउंसिल परिवार किसी भाषा के खिलाफ नहीं है, अंग्रेजी सीखना, या कोई भी भाषा सीखना बुरा नहीं है। जितनी भाषा सीखी जाए, उतना अच्छा है। लेकिन जब हमें कोई भाषा की आड़ में अपनी संबंधित संस्कृति को अपनाने की चाल चले, तो हमें सतर्क
चाहिए। हमारी मूल भाषा संस्कृत है । उसका अपना वैभव है। अधिकांश भाषाओं की जड़ है संस्कृत। हमें संस्कृत से दूर करने के लिए बड़ी-बड़ी साजिशें की गईं। हमारे विश्वविद्यालयों के पुस्तकालयों को नष्ट किए गए। हमारी शिक्षा-पद्धति पर प्रहार हुआ। हमारे बच्चे आज संस्कृत सीखने के प्रति न इच्छुक होते हैं, न हम उन्हें प्रेरित कर पाते हैं, न हम स्वयं अपनी मनःस्थिति को तैयार कर पाते हैं। ऐसा कैसे हुआ? यह एक दिन में नहीं हुआ। इसके पीछे लंबे समय से वही लोग साजिशें करते रहे, जो हमारी संस्कृति को छिन्न-भिन्न करना चाहते थे।
रामायण रिसर्च काउंसिल ने कई संतों के मार्गदर्शन में संस्कृत के प्रसार का बीड़ा उठाया है। कई संस्थाएं ऐसा पहले से कर रही हैं। हम सबसे आह्वान करते हैं कि आइए, हम साथ चलें। हमारा लक्ष्य एक है । उद्देश्य एक है । हम मिलकर चलेंगे तो हमारा सनातान, हमारी संस्कृति, हमारी भाषा ... सबको हम एकजुट होकर, मजबूती के साथ समृद्ध कर पाएंगे।
जय सीता राम जय सनातन ।

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