Ramayan Varta – Sanskrit news

Vision and Mission

रामायण के आदर्शों से संस्कारित भविष्य की ओर

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5+ वर्ष निरंतर सांस्कृतिक एवं शोध प्रयास

रामायण से संस्कारित समाज का संकल्प

रामायण रिसर्च काउंसिल शोध, सांस्कृतिक संरक्षण, जन-जागरण और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से श्रीराम एवं माता सीता के आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने तथा भारतीय ज्ञान परंपरा को भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित करने हेतु निरंतर कार्यरत है।

हमारे प्रमुख संकल्प

  • रामायण एवं भारतीय संस्कृति पर शोध और अध्ययन को प्रोत्साहन।
  • सीतामढ़ी और श्रीराम-जानकी धाम के संरक्षण एवं विकास हेतु प्रयास।
  • संस्कार, सांस्कृतिक चेतना और जन-जागरण के माध्यम से समाज निर्माण।

रामायण के आदर्शों से सांस्कृतिक जागरण की दिशा

रामायण के ज्ञान, मानवीय मूल्यों और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण हेतु हम शोध, जन-जागरण और सामाजिक सहभागिता को एक प्रभावी माध्यम के रूप में अपनाते हैं।

हमारा ध्येय

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रामायण के सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक आयामों के अध्ययन, संरक्षण और जन-जन तक प्रसार के माध्यम से संस्कारित समाज के निर्माण हेतु निरंतर कार्य करना।

हमारी दृष्टि

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एक ऐसे समाज की स्थापना, जो श्रीराम एवं माता सीता के आदर्शों, भारतीय ज्ञान परंपरा और मानवीय मूल्यों से प्रेरणा लेकर सांस्कृतिक चेतना से समृद्ध बने।

हमारे मूल्य

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सत्य, सेवा, संस्कार, समरसता और कर्तव्यनिष्ठा हमारे मूल मूल्य हैं, जो प्रत्येक गतिविधि में भारतीय संस्कृति और मानवता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हैं।

रामायण के संरक्षण एवं सांस्कृतिक जागरण के हमारे प्रमुख आयाम

शोध, सांस्कृतिक संरक्षण, जन-जागरण और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से हम रामायण के आदर्शों एवं भारतीय ज्ञान परंपरा को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाने के लिए निरंतर कार्यरत हैं।

शोध एवं दस्तावेजीकरण

रामायण, भारतीय संस्कृति और प्राचीन धरोहरों के विविध आयामों का अध्ययन, शोध, संकलन एवं दस्तावेजीकरण कर ज्ञान-संपदा को भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जा रहा है।

जन-जागरण एवं संवाद

संगोष्ठियों, व्याख्यानों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और जन-संपर्क अभियानों के माध्यम से समाज में रामायण के आदर्शों और मानवीय मूल्यों के प्रति जागरूकता विकसित की जा रही है।

संरक्षण एवं सांस्कृतिक संवर्धन

सीतामढ़ी, श्रीराम-जानकी स्थान तथा अन्य सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण, पुनरुद्धार और विकास हेतु विभिन्न स्तरों पर योजनाबद्ध एवं सतत प्रयास किए जा रहे हैं।

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संस्कार, संस्कृति और समाज निर्माण

हमारी दृष्टि एक ऐसे समाज के निर्माण की है, जो श्रीराम और माता सीता के आदर्शों, भारतीय ज्ञान परंपरा और सनातन जीवन-मूल्यों से प्रेरणा लेकर नैतिकता, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना को अपने जीवन का आधार बनाए। हम रामायण को केवल एक महाकाव्य के रूप में नहीं, बल्कि मानवता के लिए मार्गदर्शक जीवन-दर्शन और वैश्विक सांस्कृतिक धरोहर के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

हमारा उद्देश्य सीतामढ़ी सहित रामायण से जुड़े ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण, शोध एवं विकास के माध्यम से भारत की गौरवशाली विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाना तथा विश्व स्तर पर रामायण की शिक्षाओं और भारतीय संस्कृति की प्रतिष्ठा को सुदृढ़ करना है।

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