Ramayan Varta – Sanskrit news

Our Aim

रामायण के आदर्श, समाज का आधार

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Our Aim

रामायण ज्ञान, संस्कृति और मानवता का संगम

रामायण रिसर्च काउंसिल का उद्देश्य रामायण के सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, दार्शनिक और मानवीय आयामों का अध्ययन, अनुसंधान, संरक्षण एवं व्यापक प्रसार करना है। हमारा विश्वास है कि रामायण केवल एक महाकाव्य नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन, नैतिक मूल्यों, सामाजिक समरसता और आदर्श मानव चरित्र की कालजयी प्रेरणा है। काउंसिल शोध, संवाद, जन-जागरण और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से रामायण के सार्वभौमिक संदेश को जन-जन तक पहुँचाने के लिए निरंतर कार्यरत है।

रामायण से राष्ट्र, संस्कृति और चरित्र निर्माण

रामायण रिसर्च काउंसिल शोध, संस्कार, सांस्कृतिक संरक्षण और जन-जागरण के माध्यम से रामायण के आदर्शों तथा भारतीय ज्ञान परंपरा को वर्तमान और भावी पीढ़ियों तक पहुँचाने के लिए समर्पित है।

बाल संस्कार एवं सांस्कृतिक शिक्षा

समाज को सुसंस्कृत एवं संस्कारित बनाना रामायण रिसर्च काउंसिल के प्रमुख उद्देश्यों में से एक है। काउंसिल छोटे बच्चों में अनुशासन, संस्कार, नैतिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति के प्रति जागरूकता विकसित करने हेतु विभिन्न गतिविधियों का संचालन करती है। रामायण मंच के माध्यम से बच्चों को रामायण आधारित शिक्षा एवं जीवन-मूल्यों से जोड़ने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है।

भारतीय संस्कृति एवं जीवन-मूल्यों का संवर्धन

आधुनिकता के साथ-साथ समाज में पाश्चात्य प्रभाव भी तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे समय में काउंसिल भारतीय संस्कृति, परंपराओं और जीवन-मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाने तथा उन्हें दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए निरंतर कार्यरत है। हमारा उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना और भारतीय जीवन-दृष्टि के प्रति गर्व की भावना विकसित करना है।

रामायण आधारित चरित्र निर्माण

काउंसिल का विश्वास है कि छोटे बच्चे किसी भी राष्ट्र की वास्तविक धरोहर होते हैं। इसी उद्देश्य से रामायण मंच के माध्यम से बच्चों में अनुशासन, नैतिकता, संस्कार और सांस्कृतिक चेतना का विकास किया जा रहा है। यह पहल बच्चों के मन में रामायण आधारित शिक्षा और भारतीय आदर्शों के प्रति गहरी आस्था विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

श्रीराम जन्मभूमि एवं सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण

काउंसिल का मानना है कि अयोध्या स्थित श्रीरामलला मंदिर केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और सभ्यता का जीवंत प्रतीक है। इस ऐतिहासिक धरोहर से जुड़े तथ्यों, साहित्य और सांस्कृतिक महत्व के संरक्षण एवं दस्तावेजीकरण के लिए काउंसिल निरंतर कार्य कर रही है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ इसके गौरवशाली इतिहास को समझ सकें।

विशेष पत्र-ग्रंथ : ‘ए लेटर टू नरेंद्र मोदी’

22 जनवरी 2024 को श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के ऐतिहासिक अवसर पर काउंसिल ने एक विशेष पत्र-ग्रंथ ‘ए लेटर टू नरेंद्र मोदी’ की संकल्पना की। इस अभियान के अंतर्गत पूरे सनातन परिवार की ओर से माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नाम 11,111 पत्र लिखवाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया, जिससे श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के प्रति जन-आस्था और कृतज्ञता को अभिव्यक्ति मिल सके।

माता सीता प्रेरणा एवं नारी सशक्तिकरण

काउंसिल माता सीता को त्याग, मर्यादा, धैर्य और शक्ति की प्रेरणादायी प्रतीक मानती है। संस्था का उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं को भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ते हुए उनके सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक सशक्तिकरण के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करना है। इस दिशा में विभिन्न संवाद, जागरूकता और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।

सनातन संस्कृति का जन-जागरण

काउंसिल सनातन संस्कृति के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए विभिन्न साहित्यिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों का संचालन कर रही है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए समय-समय पर पत्रिकाओं, पुस्तकों, व्याख्यानों और संवाद कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिससे समाज में भारतीय संस्कृति के प्रति सकारात्मक चेतना विकसित हो सके।

साहित्य सृजन एवं प्रकाशन

काउंसिल भारतीय संस्कृति, राष्ट्रचेतना और मानवीय मूल्यों पर आधारित शोध एवं साहित्य सृजन को प्रोत्साहित करती है। इसी क्रम में ‘सनातन संग भारत’ नामक पुस्तक का प्रकाशन किया गया, जिसका विमोचन बिहार की पावन भूमि बक्सर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में हुआ। यह प्रकाशन भारतीय सांस्कृतिक चिंतन और राष्ट्रधर्म के प्रति काउंसिल की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

महाकुंभ दस्तावेजीकरण एवं संरक्षण

वर्ष 2025 के महाकुंभ में काउंसिल द्वारा संचालित प्रमुख गतिविधियों, कार्यक्रमों और अनुभवों को चित्रों सहित संकलित कर ‘महाकुंभ का महामंथन’ नामक एक वृहद कॉफी टेबल बुक के रूप में प्रकाशित किया गया है। यह पुस्तक महाकुंभ की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत को भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है।

राष्ट्र निर्माण एवं सांस्कृतिक पुनर्जागरण

काउंसिल का स्पष्ट उद्देश्य समाज को संस्कारित बनाना, नई पीढ़ी में संस्कारों का विकास करना तथा भारतीय सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण करना है। संस्था साहित्य सृजन, सांस्कृतिक संवाद, चिंतन और संतों के मार्गदर्शन में ऐसे प्रयास कर रही है, जो राष्ट्र निर्माण और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में सार्थक योगदान प्रदान करें।

सामूहिक संकल्प एवं जनभागीदारी

काउंसिल का विश्वास है कि यदि उद्देश्य पवित्र हो और संकल्प दृढ़ हो, तो समाज की सामूहिक शक्ति असंभव को भी संभव बना सकती है। इसी विश्वास के साथ संतों, विद्वानों, शिक्षाविदों और समाज के विभिन्न वर्गों को एक मंच पर जोड़कर रामायण के आदर्शों एवं भारतीय संस्कृति के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

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