Ramayan Varta – Sanskrit news

Shri Ramlala: Man Se Mandir Tak

श्रीरामलला मन से मंदिर तक

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ग्रंथ "श्रीरामलला मन से मंदिर तक" की प्रस्तावना

प्रभु श्रीरामलला के जन्मस्थान पर मंदिर निर्माण के लिए संघर्ष पर आधारित बहुत सी पुस्तकें लिखी गई हैं और इससे संबंधित कई खंडित रिपोर्ट्स पूर्व से ही इंटरनेट पर यत्र-तत्र हैं... तो फिर सवाल यह है कि इस पुस्तक की आवश्यकता क्यों ? दरअसल, पूर्व में लिखी गईं पुस्तकों में विषय से संबंधित तथ्य कम और तत्कालीन सरकारों को निष्पक्ष प्रस्तुत करने के लिए दिग्भ्रमण अधिक देखा जाता है, तो कहीं कई सारे विषयों से विषयांतर होते भी देखा गया। कुछ गिनी-चुनी अच्छी पुस्तकें भी आईं हैं। 

अयोध्या में प्रभु श्रीराम मंदिर निर्माण पर फैसला 9 नवंबर 2019 को आया और मा. प्रधानमंत्री आ. श्री नरेंद्र मोदी जी के हाथों 5 अगस्त 2020 को प्रभु श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए भूमि-पूजन का पावन-कार्य संपन्न हुआ। इस दौरान जो भी पुस्तकें, रिपोर्ट्स या इंटरनेट पर जानकारी आईं हैं, वे या तो खंडों में हैं, या किसी खास विषय-वस्तु पर आधारित है। 

‘रामायण रिसर्च काउंसिल’ का मानना है कि यह पुनीत कार्य पूरे सनातन परिवार तथा संस्कृति के लिए इस सदी का सबसे बड़ा उत्सव था, जिसका साक्षी पूरा विश्व बना। ऐसे में हमलोग पुस्तक-ग्रंथ "श्रीरामलला- मन से मंदिर तक" को जनमानस में व्यापक-स्तर पर लाने की तैयारी कर रहे हैं। 

हम इस पुस्तक-ग्रंथ को अयोध्या में प्रभु श्रीराम मंदिर संघर्ष पर आधारित अब तक की सबसे बड़ी पुस्तक इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि यह कुल 1251 पृष्ठों की है और कई अन्य अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में इसका अनुवाद किया जा रहा है। संबंधित भाषा वाले पुस्तक (ग्रंथ) का 21 देशों में प्रसार किया जाना है तथा यूएन के सभी मान्यदेशों में डिजिटल रूप से प्रसार किया जाएगा। हिन्दी भाषा में यह ग्रंथ पूर्ण हो चुका है।

पुस्तक-ग्रंथ के विषय-वस्तु पर संक्षिप्त चर्चा करें तो हमने अयोध्या की आध्यात्मिक पृष्ठभूमि से लेकर ऐतिहासिक तथ्यों और विवाद से लेकर माननीय सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक और फिर इस निर्णय के बाद विश्व स्तर पर इसके स्वागत तक पर खास ध्यान केंद्रित किया है। वहीं, गहन शोध के साथ बहुत से विषयों को एकत्रित कर विद्वानों, संतों के विचार एवं शोधपूर्ण आलेख, कई पुस्तकालयों से संकलन तथा मंदिर निर्माण हेतु संघर्ष काल के नायकों के अनुभवों को संकलित करने का कार्य किया है। 

इस पुस्तक की आवश्यकता इसलिए भी महत्व रखती है, क्योंकि इंटरनेट की दुनिया आज प्राथमिक ज़रूरतों में शामिल हो चुकी है और जिस गूगल सर्च-इंजन पर हम इंटरनेट के माध्यम से कोई विषय खोज करते हैं, वह हमारे देश का नहीं है। द्वितीय पहलू यह है कि पुस्तकें तो कई सारी हैं, लेकिन विभिन्न विषयों पर विभक्त हैं। ऐसे में, सदियों, शताब्दियों या सहस्राब्दियों बाद भी अगर कोई सनातन के ध्वज को थामने वाला पुरोधा इस विषय पर अनुसंधान करे... तो उसे सत्य की परिधि में संकलित और संदर्भित सारे तथ्य समेत कई तत्कालीन विद्वानों के शोध या आलेख एक जगहउपलब्ध हो जाएं और विश्व के लोगों को यह मालूम हो जाए कि कैसे 500 वर्षों के लंबे संघर्षकाल के बाद 20वीं शताब्दी में नरेंद्र दामोदर दास मोदी जैसे प्रभावशाली व्यक्तित्व को वर्ष 2014 में देश का नेतृत्व मिला। उन्होंने अपने पहले कार्यकाल में कई ऐतिहासिक कार्यों के साथ अयोध्या में प्रभु श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए अदालत में श्रीरामलला का पक्ष साक्ष्यपरक रूप से मजबूती के साथ रखा और आखिरकार सुप्रीम कोर्ट का श्रीरामलला के पक्ष में निर्णय आया और अपने दूसरे कार्यकाल के एक वर्ष बाद ही प्रभु के भव्य मंदिर निर्माण के लिए भूमि-पूजन का कार्य संपन्न किया... और इस तरह एक गंभीर विषय पर पूर्ण-विराम लग गया। 

पुस्तक के विषय-वस्तु पर गहराई से प्रकाश डालें तो "अयोध्या का अध्यात्म से नाता" विषय से हमने इसकी शुरूआत की है। पवित्र रामायण और रामचरितमानस के अलावा पुराणों और वेदों में अयोध्या जी और कौशल जी के वर्णन को संदर्भ सहित उल्लेख करने का प्रयत्न किया है, ताकि आने वाली पीढ़ियां अयोध्या की आध्यात्मिक गरिमा को गौरव के साथ समझ सकें। इक्ष्वाकु वंश तथा सूर्यवंश के बाद अयोध्या में सर्वधर्म सम्भाव, राजा विक्रमादित्य के द्वारा मंदिर-निर्माण, मुगलों के अत्याचार और फिर अंग्रेजों के दमन के दौरान की अयोध्या, हमारी आस्था के साथ खिलवाड़, विवाद की शुरूआत एवं श्रीरामलला के मंदिर निर्माण के लिए संघर्ष को चरणबद्ध तरीके से प्रस्तुत किया गया है। 

अदालत में गंभीरतापूर्ण सुनवाई व वर्ष 2019 में पांच जजों की पीठ द्वारा 40 दिनों तक लगातार इस मामले की सुनवाई को विशेष तरीके से दिनवार प्रस्तुत किया गया है, ताकि सहस्राब्दियों बाद भी मा. सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कोई झूठ की परत न चढ़ाई जा सके। फैसले के बाद विश्वभर में सनातनी उत्साह, मीडिया की सकारात्मक ख़बरें एवं मा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के हाथों ऐतिहासिक भूमि-पूजन और फिर अयोध्या में प्रभु के भव्य मंदिर निर्माण हेतु निधि समर्पण अभियान के साथ इस संघर्ष के साक्षी रहे कई सज्जनों एवं संतों का भावपूर्ण आलेख, अयोध्या में सर्वधर्म सम्भाव, इस भाव को स्थापित करने वाले 148 मंदिरों का विवरण, भगवान श्रीराम से संबंधित कई ऐसी भ्रांतियां जो समाज में विष की तरह घोल दी गई है, उन अधिकांश विषयों पर संतों के आलेख के अलावा दर्जनों ऐसे धार्मिक, सामाजिक तथा तथ्यपरक विचार आमंत्रित कर संकलित किए गए हैं जो सहस्राब्दियों बाद भी एक प्रमुख संदर्भ का कार्य कर सकते हैं। 

इसके अलावा इस पुस्तक-ग्रंथ में कई भारतीय भाषाओं में रामायण के वर्णन को सम्मिलित किया गया है। भगवती सीताजी के जीवनकाल (जिसका वर्णन बहुत अधिक नहीं मिलता) पर भी बहुत सारी ज्ञानवर्धक विषयक सामग्री यहां प्राप्त हो सकती है। वहीं, भगवान के विवाह-उत्सव के दौरान की झलक को शब्दों के माध्यम से आप अनुभूति कर सकते हैं, प्रभुश्रीरामजी के आदर्श जीवन-दर्शन की सुंदर झलक भी यहां से आप जान सकते हैं। साथ ही अयोध्या की लोककला, संस्कृति एवं वैभव की पौराणिक तथा ऐतिहासिक गाथा का उल्लेख करते हुए वर्तमान में कैसे उसी गौरव को वापस लौटाने की पहल की जा रही है, इस पर विस्तृत आलेख को प्रस्तुत किया जा रहा है। कोई कथावाचक या आध्यात्मिक वक्ता बनना चाहे तो यहां 10 खण्डों में विस्तृत-विषय को प्रस्तुत किया गया है।

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सबसे प्रमुख कि हम इस पुस्तक-ग्रंथ "श्रीरामलला- मन से मंदिर तक" को हिन्दी भाषा में पूर्ण कर चुके हैं। 10 अन्य अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में इसे अनुवाद कर रहे हैं क्योंकि भारत के आलावा 21 देशों में हमें इसका विमोचन करना है और संयुक्त राष्ट्र के सभी मान्य देशों में डिजिटल रूप से इसका प्रसार करना है। विदित है कि नेपाल, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, श्रीलंका, मलेशिया, सिंगापुर, संयुक्त राज्य, म्यांमार, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, दक्षिण अफ्रीका, मॉरीशस, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों में सनातन को मानने वाले हमारे अपने लोग अधिकाधिक हैं। वियतनाम जैसे कई देश हैं जहां अब सनातन धर्म को पढ़ा जाता है और उसे जानने की कोशिश भी की जाती है। ऐसे में भगवान श्रीरामलला के मंदिर निर्माण की खुशी भारत में ही नहीं, अपितु पूरे विश्व के सनातन परिवार में है। यह ऐसी खुशी है जो समस्त सनातन परिवार की संस्कृति एवं गौरव के जीवंत एवं जागृति के भाव से उत्पन्न हुई है। प्रभु श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए संघर्ष और समाधान से जुड़े उपरोक्त कई तथ्यानुगत सत्य को जब हम अलग-अलग भाषाओं में विश्व के पटल पर रखेंगे, तो समस्त सनातन परिवार हर्षित हो उठेगा। सभी अपने-अपने देश में संबंधित भाषाओं में प्रभु श्रीराम के मानव-कल्याण संदेश और अयोध्या में प्रभु के जन्मस्थान पर भव्य मंदिर के लिए संघर्ष की गाथा का बखान करेंगे।

जब हम सब मिलकर इस पुस्तक-ग्रंथ का वैश्विक स्तर पर प्रसार करेंगे तो निस्संदेह सनातन परिवार समेत भगवती सीता एवं प्रभु श्रीरामजी में आस्था रखने वाले अपनी संस्कृति पर गौरवान्वित होंगे। हमें पूरी आशा है कि इस ऐतिहासिक कार्य में आप महान प्रभु-भक्त की भागीदारी एवं मार्गदर्शन के साथ हमारे अगले उद्देश्यः ‘रामायण पर रिसर्च’ एवं उसकी व्यापकता को सफल बनाने में आप सभी श्रेष्ठजनों, महानुभावों एवं सज्जनों का आशीर्वाद हमें प्राप्त होता रहेगा।

माननीय प्रधानमंत्री जी का विशेष धन्यवाद जिन्होंने 31 अगस्त 2021 को काउंसिल तत्कालीन महासचिव श्री कुमार सुशांत जी तथा काउंसिल के बोर्ड ऑफ ट्रस्टी के अध्यक्ष श्री अजय भट्ट जी को समय देकर पूरे विषय को समझा और अपना अमूल्य मार्गदर्शन प्रदान किया। उनके मार्गदर्शक के उपरांत ही यह ग्रंथ हिन्दी भाषा में पूर्ण हो सका।

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