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शिलापूजन समारोह में पहुंचे बिहार के मा. मुख्यमंत्री जी
Tooltip Content.सीतामढ़ी में अति प्राचीन श्रीरामजानकी मंदिर का शिलापूजन बिहार में मा. मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी जी के हाथों संपन्न हुआ। श्रीजानकी नवमी के पावन अवसर पर उक्त तिथि को मा. मुख्यमंत्री जी ने काउंसिल के प्रयत्नों की प्रशंसा की। उन्होंने काउंसिल के मैनेजिंग ट्रस्टी श्री कुमार सुशांत जी के सतत प्रयत्नों को भी सराहा।
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सीतामढ़ी में मां सीताजी के प्रति काउंसिल के प्रयासों को जानिए
Tooltip Content.काउंसिल मां सीताजी को शक्ति क्षेत्र के रूप में विकसित करने हेतु वर्ष 2020 से प्रयत्नशील रही है। केंद्र सरकार और बिहार सरकार का विशेष आभार कि आपने काउंसिल के प्रयत्नों को समझा और सीतामढ़ी के अति प्राचीन (834 वर्ष प्राचीन) श्रीरामजानकी स्थान पर काउंसिल को लगभग 12 एकड़ भूमि आवंटित की।
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काउंसिल प्रत्येक कुंभ पर साहित्य तैयार करती है। बीते महाकुंभ पर देखें वीडियो
Tooltip Content.बीते महाकुंभ पर काउंसिल को वैदेहीनंदन वेदांतजी ने अपना विचार देकर 'कॉफीटेबल-बुक' - "महाकुंभ का महामंथन" के रूप में एक बड़ा विस्तृत साहित्य तैयार करवाया। मा. प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र भाई मोदी जी का विशेष आभार कि आपने रामायण रिसर्च काउंसिल की फ़ाउंडर श्रीमती ऋतु ठाकुर जी के आग्रह पर इसमें अपना विचार प्रेषित किया।
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गीता मनीषी पूज्य स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज क्या कहते हैं, ये सुनिये
Tooltip Content.19 मई 2025 को बिहार सरकार अंतर्गत बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद ने काउंसिल को जब भूमि आवंटित की गई तो 10 जून 2026 को नई दिल्ली स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब में एक प्रेस वार्ता के दौरान गीता मनीषी पूज्य स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज जी ने क्या कहा यह जानिए।
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श्रीराम मंदिर संघर्ष पर ग्रन्थ लेखन पर पूज्य स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज के विचार
Tooltip Content.काउंसिल ने श्रीराम मंदिर संघर्ष पर एक ग्रन्थ (श्रीरामलला- मन से मंदिर तक) को हिंदी भाषा में तैयार किया है। इस ग्रन्थ के लेखक श्री कुमार सुशांत और सह-लेखक श्री अजय भट्ट जी (मा. सांसद, नैनीताल-उधमसिंहनगर) हैं। हिंदी भाषा में तैयार ग्रन्थ के प्रेजेंटेशन एवं ब्रांडिंग पर श्री केवल कपूर जी ने कार्य किया है।
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छोटे बच्चों में संस्कार के संवर्धन हेतु "रामायण मंच" के द्वारा संकल्प
Tooltip Content.काउंसिल के तत्वावधान में छोटे बच्चों में संस्कार का संवर्धन कैसे हो, इसके लिए काउंसिल शुरू से ही प्रयत्नशील रही है। इसके अंतर्गत वैदेहीनंदन वेदांतजी 7 वर्ष की आयु से ही श्रीरामचरितमानस की चौपाई का वाचन करते कर छोटे बच्चों एवं अभिभावकों को प्रेरित करते आए हैं। आज भी हमारी एक टीम जगह-जगह इस पर कार्य करती रही है।संकल्प-सीतामढ़ी